नई शिक्षा नीति 2020: चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम का डीयू में हो चुका है प्रयोग

केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने को मंजूरी दी है। हालांकि चार वर्ष में स्नातक करने और बीच में छोड़कर जाने की सुविधा डीयू में पहले ही दी जा चुकी है जिसे शिक्षकों, छात्रों के भारी विरोध और यूजीसी के निर्देश के बाद वापस ले लिया गया था। उस समय डीयू के कुलपति प्रो.दिनेश सिंह थे।

प्रो. दिनेश सिंह नई शिक्षा नीति के मसौदे में सुझाव देने वालों में भी थे। नई शिक्षा नीति का उन्होंने स्वागत किया है। प्रो.सिंह का कहना है कि हम चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पहले डीयू में लागू कर चुके थे और उसका हमें बेहतरीन प्रतिफल मिला था। इसलिए हम उसके गुणवत्ता पूर्ण लाभ से परिचित थे। हमने यह देखा कि इसे शुरू करने से लाभ होगा। उसके आधार पर हम नई शिक्षा नीति का स्वागत करते हैं। उस दौरान इसको लेकर हुए विरोध के बारे में उन्होंने बताया यह वामपंथियों द्वारा किया गया विरोध था। जो तब भी यह चिल्ला रहे थे कि यह निजीकरण का प्रयास है, जबकि ऐसा नहीं था। यह गुणवत्ता परक शिक्षा की दिशा में उठाया गया कदम था।

नई शिक्षा नीति के तहत एमफिल समाप्त करने के बारे में उनका कहना है कि मैं 25 साल पहले से एमफिल समाप्त करने के पक्ष में हूं। विदेशों के विश्वविद्यालयों में भी एमफिल की पढ़ाई को विशेष महत्व नहीं है। आईआईटी दिल्ली के निदेशक रामगोपाल राव ने नयी नीति को भारत में उच्च शिक्षा के सुधार में महत्वपूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि सभी मंत्रालयों की सहभागिता से राष्ट्रीय शोध कोष के सृजन से हमारा अनुसंधान प्रभावी होगा और समाज में इसका असर दिखेगा। नई शिक्षा नीति में अनुशंसित बहु-विषयक शैक्षणिक संस्थान निश्चित रूप से आईआईटी को नए क्षेत्रों में विविधता लाने में मदद करेंगे। इंजीनियरों को अपने अनुशासनात्मक ज्ञान के अलावा, आज कई और कौशल की आवश्यकता है।