दिसंबर में 6 हजार करोड़ की आय, इसमें बड़ा हिस्सा वाणिज्यकर व आबकारी के राजस्व का

कोरोना की वजह से पिछले 8 माह से बुरी तरह गड़बड़ाई प्रदेश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है, क्योंकि दिसंबर में राज्य को 6000 करोड़ की आमदनी हुई है, जो लगभग सामान्य है। सरकार की इस कमाई में सबसे बड़ा हिस्सा वाणिज्यकर तथा शराब से हुई कमाई का है। दिसंबर में ही अर्थव्यवस्था के काबू में आने का राज्य को बड़ा फायदा यह हो सकता है कि बजट में योजनाओं को लेकर सरकार संभवत: किसी तरह की कटौती नहीं करेगी। हालांकि यह संकेत पहले ही दिए जा चुके हैं कि बजट में वही योजनाएं या काम शामिल होंगे, जो तात्कालिक रूप से बेहद जरूरी हैं।

लॉकडाउन की वजह से जब सारी व्यापारिक गतिविधियां बंद थीं, तब अप्रैल और मई में सरकार को कोई राजस्व नहीं मिला। इसके बाद जब सरकार ने औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों के लिए अनुमति दी, तब धीरे-धीरे राजस्व मिलना शुरू हुआ। इसमें भी 1000-1200 करोड़ रुपए ही आए थे। यह स्थिति नवंबर तक रही। यही वजह है कि सरकार को राजीव किसान न्याय योजना से लेकर गोधन योजना की राशि देने और अन्य जरूरी कार्यों के लिए कर्ज लेने की जरूरत पड़ी थी।

वित्त विभाग के अपर सचिव सतीश पांडेय के मुतािबक मार्च के बाद सरकार की इंडस्ट्रियल पॉलिसी ने उद्योग धंधे शुरू करने में बड़ी मदद की। इससे औद्योगिक सेक्टर में पैसा आने लगा। राजीव गांधी किसान और गोधन न्याय योजना से ग्रामीणों की आय बढ़ी। साथ ही, फिजूलखर्ची रोकने में सरकार की कसावट ने भी बड़ी भूमिका निभाई। कर राजस्व की वसूली भी बेहतर रही है। पिछले साल मंजूर योजनाएं भी इस साल के बजट में : मार्च तक सरकार ने एक भी राशि कर्ज नहीं ली थी। इसके बाद हर महीने फिक्स डिपॉजिट गिरवी रखकर आरबीआई से कर्ज लेना पड़ा। अब तक सरकार 7500 करोड़ कर्ज ले चुकी है। हर महीने पांच हजार करोड़ से ज्यादा का ब्याज भी देना पड़ रहा है। वित्त विभाग के अधिकारियों के मुताबिक राज्य को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नहीं हो सकी है, लेकिन राजस्व की स्थिति में सुधार हुआ है। पहले विभागों से 6% कटौती के साथ बजट प्रस्ताव मंगाए गए थे। केंद्र सरकार को जीएसटी से एक लाख करोड़ मिले हैं। ऐसे में केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में बिना कटौती राशि मिलने की उम्मीद है। ऐसा हुआ तो बजट का आकार बढ़ भी सकता है। पिछले साल कई योजनाओं को कोरोना की वजह से नहीं लिया जा सका। वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि जिन योजनाओं को सीएम की ओर से हरी झंडी मिल गई थी, उन्हें इस बार प्रस्ताव में शामिल कर सकते हैं। नए प्रस्तावों के साथ इन्हें भी बजट में लिया जाएगा।

इस तरह समझें आय में उतार-चढ़ाव
मद अप्रैल मई नवंबर दिसंबर
स्टांप/रजिस्ट्रेशन 2.55 68.05 117 753
आबकारी 7.62 242 403 2581
वाणिज्यकर 32.40 150 343 2109
परिवहन 14.26 29.53 14 621

*राशि करोड़ रुपए में

सड़क, बिजली, पानी पर फोकस
इस बार भी राज्य सरकार का फोकस उन योजनाओं पर ही होगा, जो सीधे लोगों से जुड़ी हैं। इसके अलावा सड़क, बिजली, पानी जैसे बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उसकी मरम्मत के लिए सरकार बजट प्रावधान करेगी, जबकि गैर जरूरी निर्माण कार्यों के लिए राशि का प्रावधान नहीं किया जाएगा। बीजेपी शासन में कई भवन तैयार किए गए थे, जिनमें से कई का अभी भी कोई उपयोग नहीं हो रहा है। इसलिए बजट में ऐसे प्रावधान भी नहीं किए जाएंगे।

लोगों की आमदनी बढ़ी तो बाजार में रौनक लौटी
“राज्य सरकार द्वारा लोक हितैषी और रोजगारमूलक कार्य किए गए। धान, मक्का, गन्ना के समर्थन मूल्य के अलावा वनोपज के मूल्य में भी वृद्धि की गई। लोगों की आमदनी बढ़ी तो बाजार में भी रौनक लौटी। इस तरह अर्थव्यवस्था में सुधार आया है।”
-टीएस सिंहदेव, वाणिज्यकर मंत्री