वैक्सीन के दोनों डोज के बाद भी 8 से ज्यादा संक्रमित, रायपुर में एक मौत भी

  • पहले टीके के तुरंत बाद जिन्हें दो दिन से ज्यादा बुखार, वे करवाएं कोरोना टेस्ट

वैक्सीन के दोनों डोज के बाद प्रदेश में 8 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं। ऐसे मामले राजधानी रायपुर में अधिक हैं। कोरोना मामलों के स्टेट मीडिया प्रभारी डा. सुभाष पांडेय ने भी दोनों डोज लगवाए थे, उनकी दो दिन पहले कोरोना से राजधानी के एम्स में मृत्यु हुई है। यही नहीं, कोरोना के इलाज में लगे नामी डाक्टरों के मुताबिक पहले डोज के बाद सात-सात दिन तक बुखार के मामले भी उनके पास पहुंच रहे हैं और अधिकांश कोरोना पाजिटिव निकल रहे हैं।

इसे लेकर चिकित्सा जगत में बहस छिड़ी हुई और रिसर्च की बातें चल रही हैं। हालांकि डाक्टरों का मानना है कि वैक्सीनेशन के बाद एंटीबाॅडी बनने में दो-तीन हफ्ते लगते हैं, उसके बाद कोई भी व्यक्ति सुरक्षित हो पाता है बशर्ते कि वह मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करता रहे। डाक्टरों का कहना है कि रिसर्च तो नहीं हुई, लेकिन ऐसा लगता है कि कंप्लीट वैक्सीनेशन के बााद जिन्हें कोरोना संक्रमण हो रहा है, यह संभव है कि उनके शरीर में एंटीबाॅडी नहीं बन पाई हो। हालांकि वेक्सिनेशन वाले अधिकांश लोग इलाज के बाद स्वस्थ हो गए हैं।

जांजगीर कलेक्टर हाल ही में कोरोना संक्रमित हुए थे, जबकि उन्होंने पहला टीका लगाया था। इसके अलावा पुलिस विभाग का एक सिपाही भी पॉजिटिव आया। इसके अलावा तीन हेल्थ वर्कर भी संक्रमित हुए और इलाज के बाद ठीक हो गए। प्रदेश में हेल्थ वर्कर के बाद, फ्रंट लाइन वर्कर, सीनियर सिटीजन व 45 वर्ष से ज्यादा उम्र वालों को टीके लगाए जा रहे हैं। अब 48 लाख से ज्यादा लोगांे को टीके लगाए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे डिप्थीरिया से बचाव के लिए टीके लगाए जाते हैं, देखने में आता है कि इसका असर जीवनभर रहता है। कभी-कभी 5 साल में बूस्टर लगाया जाता है। लेकिन कोरोना के मामले में ऐसा नहीं है। अभी यह कहना सही नहीं होगा कि वैक्सीन लगाने के कितने दिनों तक एंटीबॉडी बनी रहेगी। इस पर अभी स्टडी नहीं हुई है।

तत्काल नहीं बनती एंटीबॉडी
मेडिकल कॉलेज के रिटायर्ड डीन डॉ. सीके शुक्ला व हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गाेयल के अनुसार वैक्सीन लगाने के तत्काल बाद एंटीबॉडी नहीं बनती। एंटीबॉडी बनने में लगभग 2 से 3 सप्ताह लगता है। वैक्सीन लगाने के बाद सबसे पहले शरीर के अंदर कई बदलाव होते हैं। बैक्टीरिया, वायरस, कवक, कैंसर या एलर्जी के जवाब में हमारे शरीर में पांच प्रकार के एंटीबॉडी होते हैं। इन्हें इम्युनोग्लोबुलिन (आईजीएम) कहते हैं। ये वाई आकार की एंटीबॉडी खुद को बाहरी पदार्थ (एंटीजन) में संलग्न करके काम करते हैं और उनके मूवमेंट को रोकते हैं। एक-दूसरे को एक प्रक्रिया में संलग्न करने का कारण बनते हैं, जिसे एग्लूटिनेशन कहा जाता है। कोई भी बीमारी का संक्रमण होने के बाद एंटीबॉडी बनती है।

एक्सपर्ट: सर्दी-बुखार हो तो कोरोना जांच के बाद ही लगाएं वैक्सीन
लोग बुखार, सर्दी व खांसी रहने के बावजूद वैक्सीन लगवा रहे हैं। 7 से 15 दिनों के भीतर कोरोना के लक्षण हो तो टीके न लगवाएं। ऐसे में टीके के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। लक्षण हो तो कोरोना जांच करवाएं। नेगेटिव रिपोर्ट आने पर ही वैक्सीन लगवाएं। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी न छिपाएं। एलर्जी होने पर टीके से दूर रहें। कोरोना से ठीक होने के एक से डेढ़ महीने बाद वैक्सीन लगाने जाएं।
– डॉ. आरके पंडा, सदस्य-कोरोना कोर कमेटी

दावा 3 साल इम्युनिटी का, अभी स्टडी नहीं
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास मेडिकल ब्रांच में एक्सपेरीमेंटल पैथोलॉजी ग्रेजुएट प्रोग्राम के डायरेक्टर जेरे मैकब्राइड ने मॉडर्ना व फाइजर-बायोएंडटेक के वैक्सीन पर बड़ा दावा किया था। उनका दावा था कि मॉडर्ना व फाइजर-बायोएंडटेक की वैक्सीन 2 से 3 साल के लिए इम्युनिटी बढ़ा सकती है। यह अवधि कम या ज्यादा भी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों को ये वैक्सीन लगाई गई है, उन पर स्टडी के बाद ही इम्युनिटी के बारे में कुछ कहा जा सकता है।